चित्त भ्रामरी साधना
ॐ श्री गुरूचरण कमलेभ्यो नमः। शिवरात्रि साधना शिविर की तयारी चल रही थी। मुझे बहुत से साधको की साधनात्मिक समस्या का ध्यान आ रहा था। साधक अक्सर यह सवाल करते है, ”गुरूजी बहुत लम्बे समय से साधना कर रहे हैँ, लेकिन आज तक प्रत्यक्षीकरण तो बहुत दूर छोटा सा अनुभव भी नहीं होता “ ऐसा सवाल अक्सर ही कई साधको की तरफ से पूछा जाता रहा। इस सवाल का उतर ढूंढने के लिए मैं अक्सर ध्यान चिंतन करता रहता। नाम करते हुए चिंतन में दिव्य आत्माओ से अक्सर मुलाक़ात होती रहती थी। उस दिन भी मैं इसी चिंतन में था।
दक्षिणकाली साधना
ॐ शवारूढां महाभीमां घोरदंष्ट्रां हसन्मुखीम् ।चतुर्भुजां खड्गमुण्डवराभय करां शिवाम् ॥ १॥मुण्डमालाधरां देवीं ललज्जिह्वां दिगम्बराम् ।एवं सञ्चिन्तयेत्कालीं श्मशानालय वासिनीम् ॥ २॥ माता दक्षिणकाली से मेरा जुड़ाव तब से है जब मैं गुरुजी से मिली भी नहीं थी । नाम दीक्षा लेने से पहले जब मैं सदगुरुदेव का स्मरण करती थी, कोई मातृशक्ति कभी कभी मेरे पास आती थी कभी ध्यान में, कभी तंद्रा में तो कभी स्वप्न में । वो कोई अनजान संकटों से मेरी रक्षा करती थी और मैं कभी गलत करूँ तो डाट भी लगाती थी, तो कभी छोटे बच्चे की तरह गोद मे सुलाती भी थी । मैं
मां अष्ट काली या शमशान काली साधना
यह एक ऐसी शक्ति है जो अपने आप में पूर्णता प्राप्त किए हुए हैं मां अष्ट काली साधना सेमेरे जीवन में एक अलग ही उन्नति मिली जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी,एक समय था जहां लाख कोशिशों के बावजूद भी मैं अपने जीवन में हर जगह से फेल होती जा रही थी मुझे नेगेटिव शक्तियों ने इस तरीके से घेर रखा था मानो मकड़ी की जाल, जिसमें से निकलना मेरे लिए बहुत मुश्किल होता जा रहा था, उस समय मैं अपनी खुली आंखों से उन नेगेटिव शक्तियों को अपने बेड के किनारे अपने आसन के चारों तरफ देखती


